रविवार, 2 सितंबर 2012

व्यथा

मेरे अपने मुझसे नाराज यूँ है, की दिल कहीं  लगता ही नहीं है .

मेरे अपने मुझसे नाराज क्यूँ है,पता हो तो नाराजगी दूर करूं.

तुम्हारी ख़ामोशी मुझे काट रही है,आओ पास तो कुछ बात बढे 

छोटी छोटी बातों से हो नाराज,क्यूँ ख़ुशी से यूँ  दामन छुड़ा लेते हो. 

तुम  हो उदास और मैं भी हूँ बेचैन,काश तुम को  गले हम लगा लेते..

मेरे अपने मुझसे नाराज यूँ है, की दिल कहीं  लगता ही नहीं है .

मैं समझी नही तुम रोये  क्यूँ ,मेरी ख़ुशी से तुम नाराज थे  क्यूँ ,

गैरों को तुम अपना बना बैठे,अपने तुम्हे अब चुभने लगें हैं.

दूसरों की ख़ुशी में  चहकते फिरे थे,अपनों से मानों सरोकार ही नहीं है.

ऐसे न बदलो ,हम मर जायेंगे,ख़ुशी तुम बिन अधूरी पड़ी है.

सोमवार, 20 अगस्त 2012

यथार्थ - ख़ुशी को भी अकेले आने डर लगता है.


ख़ुशी को भी  अकेले आने डर लगता है.


कहते हैं दुःख कभी अकेले नहीं आती है,
पर मुझे तो लगता है .......
सुख भी कभी अकेले नहीं आती है.
कभी विशुद्ध-निखालिस ख़ुशी देखी है?
मैंने तो नही देखी......
ख़ुशी की बदली छाती तो जरूर है,
पर किनारों पर कालिमा भी ,
साथ देख ही जाती है .
हंसी,ख़ुशी के साथ रंग-बिरंगी .
फ्राक पहने इठलाती है.
पर नाखुशी के छोटे पैबंद ,
मुहं चिदाते रहते हैं.
एक की मनोकामना पूरी हुई,ख़ुशी आई
दूसरा अपनी अधूरी आकांक्षों से,
बिसूरता ही दीखता है.
ख़ुशी कभी खुल कर आओ,
सिर्फ सुख ही साथ लाओ.

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

नाराजगी



 नाराजगी 

तुम्हारी बातें अब मुझको छूती नहीं हैं,
कुछ भी कहो मुझको कुछ होती नहीं है,

तुम मेरे जान,जिगर और साँस थे,
मेरे लिए अब तुम बस एक आस हो.
जब मेरे जीवन में तुम आये,
आते ही मेरे मानस पर तुम छाए.
मैंने अपने सारे फर्ज निभाए,
हमारे रिश्ते को खा गयीं सर्द हवाएं .

तुम्हारी बातें अब मुझको छूती नहीं हैं,
कुछ भी कहो मुझको कुछ होती नहीं है,
कैसे जीवन का पहिया है चलता,
प्राथमिकतायें जीवन का सदा है बदलता.
जहाँ मैं थी वहाँ कोई और है,
जीवन का एक नया दौर है.

तुम्हारी बातें अब मुझको छूती नहीं हैं,
कुछ भी कहो मुझको कुछ होती नहीं है,
मेरी कमी अब तुम को खलती नहीं है,
बेरुखी तुम्हारी अब रूलाती नहीं है.
रूखे से रुखा है व्यवहार तुम्हारा,
लगता नही की तुम थे कलेजा हमारा.
कभी तुम थे मेरे पलकों पर पलते,
रिश्ता अब हमारा हैं पलकें भिगोतें .


तुम्हारी बातें अब मुझको छूती नहीं हैं,
कुछ भी कहो मुझको कुछ होती नहीं है,

बातें न बद जाए सो सहती हूँ तुम को,
नाता न टूटे सो कुछ कहती नहीं तुमको.
तुम आओ न आओ तुम्हारी है मर्जी,
पता नहीं मैंने क्या गलती करदी.
अगर मैं हूँ एक भूली बिसरी याद,
तो मुझको भी नहीं करनी तुम्हारी बात.

तुम्हारी बातें अब मुझको छूती नहीं हैं,
कुछ भी कहो मुझको कुछ होती नहीं है,